कहानी बड़ी सुहानी | Dofollow Social Bookmarking Sites 2016
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एक बार एक राहगीर यात्रा करने के कारण थक गया! अत: उसने इधर- उधर नज़र दौड़ा कर देखा कि कहीं कोई उपयुक्त स्थान मिल जाएं, जहां रुककर वह कुछ समय के लिए विश्राम कर सके! एकाएक उसकी दृष्टि सामने एक आश्रम पर जाकर ठहर गई! वह संत सुकरात का आश्रम था! पथिक सोचने लगा, यदि यहां कुछ दिन ठहरने का अवसर मिल जाए तो कितना अच्छा हो! मै भी सत्संग- प्रवचनों का लाभ उठा सकूंगा! यही सोचकर वह संत सुकरात के पास पहुंचा! सुकरात ने तुरन्त आज्ञा दे दी और उस व्यक्ति को ठीक अपने सामने वाले कमरे में ठहरा दिया!